GSLV Mark III D2 rocket

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बाहुबली जीएसएलवी मार्क-3 डी2 रॉकेट की सफल उड़ान के साथ ही भारत के चंद्रयान-2 व मानव मिशन गगनयान की राह भी आसान हो गयी है।बुधवार को इस रॉकेट के जरिये इसरो ने 3423 किग्रा की अपनी अब तक की सबसे भारी सैटेलाइट जिसेट- 29 को आकाश में प्रस्थापित किया। इस सैटेलाइट से जम्मू-कश्मीर, उत्तर पूर्वी राज्यों के हिस्से तक इंटरनेट की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी, कैमरे ‘जियो आई’ से हिन्द महासागर तक दुश्मन पर नज़र, नई तकनीकों के क्यू एंड वी बैंड्स और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन को भी इसके साथ भेजा गया है।

इस मौके पर पीएम मोदी जी ने कहा” वैज्ञानिकों को बधाई। इस सफलता ने किसी भारतीय लॉन्च व्हीकल के सबसे भारी सेटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचाने का नया रिकॉर्ड बनाया है।”

स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन वाले जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट की दूसरी सफल उड़ान के बाद इसरो के वैज्ञानिकों के हौसले बुलंद हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के. सिवान ने बुधवार को उड़ान के बाद घोषणा की कि मार्क-3 का पहला अधिकृत मिशन जनवरी, 2019 में चंद्रयान-2 होगा।

सिवान ने बुधवार को मार्क-3 की उड़ान के बाद कहा, मिशन टीम सही राह पर है और पहले से ही काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह शानदार लांच व्हीकल अगले 3 साल में अंतरिक्ष में किसी भारतीय मानव को ले जाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, इसरो ने देश के इस महत्वाकांक्षी अभियान के लिए 2021 का लक्ष्य तय किया है, जिसमे हम दिसंबर, 2020 में पहला मानवरहित गगनयान अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार हैं। सिवान ने कहा, हम अंतरिक्ष में मानव भेजने से पहले काम से कम दो मानवरहित विमान भेजकर तैयारी परखना चाहते हैं।

इसलिए खास है उड़ान
1. 640 टन वजन का है जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट।
2. 10 टन वजन तक के उपग्रह को ले जा सकता है साथ।
3. 15 साल लगे ईसरो को इस रॉकेट का इंजन बनाने में।
4. 13 मंजिला इमारत के बराबर ऊंचा है 43.49 मीटर लंबा रॉकेट।
5.200 एस बूस्टर लगा है इसमे, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बूस्टर है।
6. 3 चरणों वाला लांच व्हीकल है, जिसमे आखिरी स्टेज क्रायोजेनिक है।
7.4 टन स्व ज्यादा वजन वाले मानव मिशन यान को ले जाएगा।

GSLV Mark III D2 Image

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